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प्रभुजी!आपने कतरास को बना दी
'पॉलिटिक्स इंडस्ट्री'

प्रभुजी!आपने कतरास को बना दी 'पॉलिटिक्स इंडस्ट्री'


संपादकीय।

रेल का खेल जारी है। शायद आज़ादी की तारीख 15 अगस्त तक खेल जारी रहेगा। फिर तमाशा में तब्दील हो जाएगा यह खेल। अभी तक खादी वाले नेता भेष बदलकर गला साफ कर रहे हैं।जब रेल का यह खेल फेल हो जाएगा तब सारे भोंकनेवाले मदारी बन जाएंगे। अभी गाजा बाजा है। तब हाथों में डुगडुगी होगी।
अगर किसी बड़े मालिक को कोयला निकालने का ठेका मिल जाय तो ये सारे लाल बाबू, हेमन्त,शीत, बसन्त उनसे पंजा लड़ाएंगे ताकि उन्हें उनकी 'कीमत' मिले।

जेते बड़ हल्ला;ओते बड़ रसगोल्ला।

जरा यह देखिए। रेल से ज़्यादा फिक्र नेता बनने की है। लगता है कि प्रभु की कृपा से कतरास में पॉलिटिक्स इंडस्ट्री की ज़मीन तैयार हो जाएगी।संचालक ने सीधे झारखंड के पूर्व आका को माइक थमा दिया ताकि पॉलिटिक्स न हो। बिना कम्पाउण्डर की डिग्री के डॉक्टर बने बालक चिल्लाने लगा,'जेल दो,जेल दो'। सोरेन ने हॉर्न बजाया। ई का बोल रहे हो? रेल दो,रेल दो बोलो न। जेल दो बोलने से पब्लिक उड़ न जाएगी!तभी राजाजी उठे। बोले माइक टोपीजी को दें।तभी झा..ल बजने लगा। कोई हेमन्त के कान में फुसुक दिया ई टोपी,झाल..सब लालबाबू के साथ थे। 9 को फिर उसी को लाल करेंगे।
एक पत्रकार ने इस इलाके का नाम पॉलिटिक्स स्ट्रीट रखा था। कभी यहां से आज़ादी के दीवाने पैदा हुए थे।
प्रभुजी की कृपा से पॉलिटिक्स स्ट्रीट अब पॉलिटिक्स इंडस्ट्री बन गयी है। रेल के खेल में लाल,पीले,मृदंग,झाल सब किस्मत आजमा रहे हैं।
अवाम ठगा सा महसूस कर रहा है।

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