साइबर क्राइम की काली कमाई से झोपड़ियों में बन गए बंगले, एक दमाद ने पूरे गांव को बना दिया साइबर ठग
साइबर क्राइम की काली कमाई से झोपड़ियों में बन गए बंगले, एक दमाद ने पूरे गांव को बना दिया साइबर ठग
धनबाद, संवाददाता।
पगडंडियों के रास्ते चार साल पहले जब लोग टुंडी के चरकखुर्द गांव पहुंचते थे तो यहां चारों तरफ मिट्टी की झोपड़ियां नजर आती थीं। झोपड़ियां तो आज भी हैं, लेकिन झोपड़ी के बगल में आलीशान बंगले चरकखुर्द की बरकत की नई कहानी बयां कर रहे हैं। दो दिन पहले टीम के साथ छापेमारी करने पहुंचे डीएसपी मुकेश महतो ने बताया कि गांव की तस्वीर इस कदर बदल चुकी है कि वर्षों बाद यदि कोई यहां आए तो वह गांव को पहचान ही नहीं पाएगा।
छापेमारी के दौरान चरकखुर्द की समृद्धि देख पुलिस टीम भी चकित रह गई। ऐसा नहीं है कि गांव के लोगों को कुबेर का खजाना हाथ लग गया है। ये सब संभव हुआ है साइबर अपराध से। साइबर अपराध की दुनिया में गांव के किशोर और युवाओं ने ऐसा पैर जमाया कि 48 महीनों के इस छोटे से अंतराल में बड़ी अटालिकाएं खड़ी हो गईं। डीएसपी मुकेश महतो ने बताया कि चरकखुर्द में 40 से अधिक घर ऐसे हैं, जिसकी लागत 50 लाख या इससे अधिक है। घर के अंदर आरमतलवी के सारे साजो-सामान मौजूद हैं। एयर कंडिशन कमरों में हजारों रुपए का म्यूजिक सिस्टम और बड़ी-बड़ी एलइडी टीवी, हाईस्पीड बाइक और कार यहां हर घर में आम है। छापेमारी के लिए गए प्रशिक्षु डीएसपी अरविंद कुमार, महेश प्रजापति और जयश्री कुजूर सहित चार थानों के प्रभारी और पुलिस जवानों के लिए भी यह अलग तरह का अनुभव था।
जब्त दो दर्जन एटीएम में छिपा है समृद्धि का राज:-
डीएसपी ने बताया कि गांव में करीब आठ घरों को खंगाला गया। घरों के अंदर से दो दर्जन से अधिक एटीएम जब्त किए गए हैं। इन एटीएम के सहारे साइबर ठगों की पोल खोला जाएगा। एटीएम के साथ-साथ जब्त किए गए 22 मोबाइल भी ठगी की कलई खोलने के काम आएंगी। डीएसपी ने बताया कि चरकखुर्द की निगाहबनी जारी है। इस गांव का सीधा लिंक गिरिडीह और जामाताड़ा के साइबर ठगों के साथ है। पुलिस जांच में जुटी हुई है।
एक दमाद ने पूरे गांव को बना दिया साइबर ठग:-
चरकखुर्द का दिलचस्प किस्सा है। देश में जामताड़ा का करमाटांड़ सबसे पहले साइबर ठगी के मामले में चर्चा में आया। जांच में यह बात पुष्ट हो चुकी है कि करमाटांड़ में साइबर ठगी के हर तौर-तरीके की ट्रेनिंग दी जाती है। इस काम में वहां का सीताराम मंडल एक्सपर्ट है। सीताराम मंडल चरक गांव का दामाद है। उसी ने पूरे गांव को साइबर ठगी की विद्या में महारथ दिलाई। सीताराम के बारे में कहा जाता है कि उसके घर में सेंसर लगे हैं। रिमोर्ट से उसके घर के दरवाजे खुलते हैं।
जीजा की ठाठ देख साले ने छोड़ दी थी पढ़ाई:-
तीन नवंबर की रात चरकखुर्द पहुंची पुलिस ने सीताराम के ससुर डोमन मंडल के घर भी दबिश दी थी। वहां से लैपटॉप और तीन मोबाइल जब्त किए गए हैं। दो साल पहले पुलिस ने सीताराम के ससुर और साले संतोष मंडल को पकड़ा था। संतोष ने पुलिस को बताया था कि जीजा की ठाठ-बाट देख वह मुंबई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ कर टुंडी आ गया था। जीजा के निर्देशन में चरकखुर्द में उसने गिरोह तैयार किया था, जो आज भी सक्रिय है।
खेत में बैठ करते हैं फोन, कहते हैं मुंबई से बोल रहा हूं..:-
छापेमारी में पुलिस ने गांव से विकास मंडल और रंजीत मंडल को पकड़ा था। तीन नवंबर की दोपहर रणधीर वर्मा चौक से धनबाद पुलिस ने पिंकू मंडल को दबोचा था। तीनों को रविवार को जेल भेज दिया गया। इससे पहले तीनों ने पूछताछ में पुलिस के समक्ष खुलासा किया कि उनके गांव में 30-40 लड़के एटीएम ठगी के काम में सक्रिय हैं। खेतों में बैठ कर गिरोह के सदस्य लोगों को फोन लगाते हैं और सामने वाले से कहते हैं कि बैंकों के हेड ऑफिस मुंबई से बोल रहे हैं। मूल रूप से एटीएम की वैद्यता बढ़ाने और बैंक खातों को आधार से लिंक कराने के नाम पर एटीएम की जानकारी लेकर ये लोग पैसा उड़ा लेते हैं।
ठगी में शामिल था होमगार्ड सिपाही का बेटा:-
चरक गांव से पुलिस ने जिस रंजीत मंडल को पकड़ा है उसके पिता विनोद मंडल होमगार्ड में सिपाही हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि एटीएम ठगी गिरोह में चरक गांव के 14 से 16 साल के कई लड़के शामिल हैं। ठगों ने बताया कि इन्हें ट्रेनिंग देना आसान है। ये इतनी अच्छी हिंदी बोलते हैं कि सामने वाले असली-नकली का भेद ही नहीं कर पाता। पुलिस इनके पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। कई राज्यों की पुलिस को भी इनकी तलाश है।
गांव के फोन, खरीदारी और बैंक एकाउंट पर पहरा:-
झारखंड सरकार ने नक्सलियों की तरह साइबर क्राइम के खिलाफ भी मुहिम छेड़ दी है। डीजीपी के आदेश पर धनबाद पुलिस ने चरकखुर्द गांव की आबोहवा पर पहरा बैठा दिया है। टावर के माध्यम से गांव में आने-जाने वाले फोन पर निगरानी रखी जा रही है। गांव के लोगों के बैंक एकाउंटों की जासूसी पहले से ही हो रही है। अब गांव के लोगों के घरों में आने वाले नए सामान पर भी पुलिस की नजर है। ऐसी शिकायत मिली है कि एटीएम की जानकारी हासिल कर साइबर ठग ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। सामान कहीं शहरी क्षेत्र में मंगाकर इसे गांव लाया जाता है।
आप रहेंगे सचेत तो चरक की बरकत होगी फीकी:-
- किसी भी व्यक्ति को अपना एटीएम, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग का विवरण नहीं बताएं
- फोन और मेल पर एटीएम का विवरण पूछने वालों के संबंध में पुलिस को जानकारी दें
- चेहरा पहचानो या लक्की नंबर बताकर कोई पुरस्कार जिताने की बात करे तो उसके झांसे में न आएं
- एटीएम के ऊपर अपना कोड कभी न लिखें
- वरीय अधिकारी बनकर कोई मोबाइल रिजार्च करने की बात कहे तो न कराएं
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