बगैर पद सृजन के ही बन गये तीन-तीन स्वास्थ्य केंद्र
बगैर पद सृजन के ही बन गये तीन-तीन स्वास्थ्य केंद्र
गोड्डा, संवाददाता
जिले में वर्षों पूर्व तीन नये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया गया है. लेकिन इनका निर्माण भी बगैर पद सृजन के ही हो गया है. मतलब ठेकेदारी के लिए. वर्षों निर्माण कार्य पूरा हुआ पर चिकित्सक की कौन पूछे एएनएम तक की पोस्टिंग नहीं हुई. इसमें रूपुचक, मोतिया व सिंघाड़ी का प्रा स्वा केंद्र है. करोड़ों की राशि से आम लोगों का भला नहीं हुआ बल्कि ठेकेदार व विभाग के अधिकारियों का ही भला हुआ है.
*कालाजार भगाना चुनौती भरा काम*
संताल के जिले में गोड्डा जिला को भी कालाजार उन्मूलन की सूची में रखा गया है. जिले में भी हर साल कालाजार रोगियों की संख्या बढ़ जाती है. हर हाल में जिले को कालाजार उन्मूलित करना है. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि जिले में मलेरिया पदाधिकारी तक नहीं है. यहां तो मलेरिया पदाधिकारी का पद तक सृजित तक नहीं है. यहां भी जैसे-तैसे राम भरोसे व्यवस्था चल रही है.
गोड्डा में सबसे ज्यादा है मातृ शिशु मृत्यु दर, करोड़ों का अस्पताल ही हो गया है बीमार
जिले की हालत तो देखिये. गोड्डा जिला झारखंड में ऐसा जिला है जहां मातृ शिशु मृत्यु दर सबसे ज्यादा है. यहां अस्पताल का निर्माण भी वर्षों पूर्व हो गया है. लेकिन कहां यह विभाग के अधिकारी को छोड़कर शायद ही किसी को पता हो. अस्पताल का निर्माण जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर करमाटांड़ में किया गया है जो अब भुतबंगला हो ही गया है. भवन खंडहर में तब्दील हो गया है.
जिले में चिकित्सकों की घोर कमी है. फिजीशियन तक नहीं हैं. सदर अस्पताल में इलाज के लिये चिकित्सकों की अत्यंत कमी है. इसको लेकर विभागीय स्तर पर कई बार पत्राचार किया गया है. बहाली होने की जल्द ही संभावना है. तभी स्थिति में सुधार संभव है.
- वनदेवी झा,सिविल सर्जन
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