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पाकुड़ नगर परिषद कर रहा सरकारी खजाना का दुरुपयोग

पाकुड़ नगर परिषद कर रहा सरकारी खजाना का दुरुपयोग

पाकुड़ नगर परिषद कर रहा सरकारी खजाना का दुरुपयोग

सरकारी खजाने का कैसे दुरूपयोग होता है इसकी बानगी पेश करती ये " सरकारी शौचालय " की तस्वीरे आपको इस बात की ताकीद करेगी कि " जहाँ सोच वहाँ शौच " की कहावत गलत है बल्कि पाकुड़ नगर परिषद के लिए " जहाँ शौच वहीं सोच " सही है । यह शौचालय मालपहाड़ी रोड पर अवस्थित है । इसकी लागत कितनी है, यह कब बनी है ? इन सब प्रश्नो के जबाब आप ढूँढे । कल मैने अपने सहयोगी के साथ जब इस शौचालय का दर्शन किया तो एक बारगी माथे पर बल पड़ गए । पहले यह इतना भव्य हुआ करता था कि अनजाने आदमी इसे मंदिर समझकर प्रणाम करके निकल जाता था । आज यह खंडहर मे तब्दिल हो चुका है अंदर दरवाजे नदारद है । दो मंजिला इस शौचालय का ये फोटो रात के 8:30 बजे की है । मुख्य दरवाजा खुला हुआ मानो असामाजिक तत्वो को खुला आमंत्रण दे रहा हो कि आओ अपनी काली कुभावनाओ और कुकृत्य को तुम अपनी कर्तृत्वशक्ति मे बदल सकते हो । इसके अलावा शहर मे ऐसे कई जगहो पर शौचालय का निर्माण किया गया है जहाँ के लोग घर से सीधे हाथ मे लोटा लेकर खुले खेत की ओर निकल पड़ते है । कुछ शौचालय का इसलिए पुनर्उद्धार किया गया क्योंकि वे जूए के अड्डे मे तबद्दिल हो चुके थे । शहर मे कुछ शौचालय तो उसके संचालको के द्वारा आवासीय बना दिया गया है और कुछ का तो भंडार गृह के रूप मे उपयोग हो रहा है ।
सवाल है कि स्वायतता प्राप्त संस्था " नगर परिषद " के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की सोच को क्या हो जाता है जब " नगर विकास " के नाम पर पूरे शहर को शौचालय मे ही तब्दिल किया जाने की बात आती है । इसी तरह गंगा जल को पेयजल के तौर पर शहर मे लाने की योजना आधी रह गया । कलपाड़ा के तहत जल मीनार बिना जल के खड़ा है, विभाग मौन है , संवेदक का पलायन हो चुका है । हमारे वार्ड पार्षदों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता और जनप्रतिनिधि ऐसे मामलो मे क्यों सहिष्णू बन जाते है ? मालूम नही और जनता जहमत उठाना नही चाहती और सरकारी संसाधन का यूँ बंदरबाँट बदस्तूर जारी है  फिलहाल इतना ही । आगे भी लिखुँगा ।

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