प्रभु के पास आने से मिलती है शरणागति : निरजानंद शास्त्री
मंगलवार, 9 अप्रैल 2024
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धनबाद: मंगलवार को मानस प्रचार समिति, मानस मंदिर,जगजीवन नगर में रामचरितमानस के नवाह परायण के चौथे दिन सुबह में विंध्याचल से पधारे देवी प्रसाद पांडे के द्वारा राम वनवास प्रसंग का पाठ हुआ।जिसमे श्रद्धालु विरह में भाव विभोर हो गए।
पंडित ज्योति नारायण झा के अचारत्व में यज्ञमान उज्ज्वल वर्मा , मणिका कीर्ति वर्मा एवम चंद्रशेखर शर्मा,जया शर्मा ने मंगलवार के कर्मकांड को पूर्ण किया।संध्या बेला में रामकथा के अवसर पर काशी से आए विद्वान मानस किंकर निरजानंद शास्त्री ने धनुष यज्ञ एवम लक्ष्मण परशुराम संवाद का प्रवचन किया। उन्होंने कहा धनुष अहंकार का प्रतीक है परमात्मा अहंकार रूपी धनुष को तोड़ दिए लेकिन द्वापर में रस्सी को नही तोड़ पाए क्योंकि धनुष भगवान से दूर होता गया ,जो भगवान से दूर चला जाता है वो टूट जाता है ।और जो भगवान के समीप आ जाता है वो टूटता नही है बल्कि परमात्मा से जुड़ जाता है। रस्सी परमात्मा के समीप होती गई इसलिए भगवान रस्सी को नही तोड़े,धनुष को तोड़कर सीता जी के गले में वरमाला पहनाई,सीता जी ने रामजी के गले में वरमाला पहनाई।ज्ञान और भक्ति के सम्मिलन से परमानंद की प्राप्ति हुई।कथा में मुख्य अतिथि के तौर पर धनबाद के विधायक राज सिन्हा , सी बी आई के एस पी पी के झा, डॉ. सरिता सिन्हा प्रिंसिपल दिल्ली पब्लिक स्कूल, कल्याणी प्रसाद बायसप्रिंसिपल
दिल्ली पब्लिक स्कूल आदि थे। स्वागत निरंजन सिंह ने किया।मंच संचालन निशांत नारायण ने की धन्यवाद ज्ञापन विनोद दुबे ने की।समिति के बी एम शर्मा, आर एन झा,गिरीश तिवारी, एन के ठाकुर,रामेश्वर प्रसाद,संतोष कुमार,लालटू ,अरविंद कुमार के अलावा धनबाद के सैकड़ों श्रद्धालु जुटे और प्रसाद पाए कथा का श्रवण किए।
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