बड़कागांव थाना क्षेत्र के सेहदा चपरी और गोंदलपुरा इलाके में संचालित अवैध कोयला कारोबार चरही रेलवे साइडिंग से फोरलेन एनएच पर चढ़ते ही अचानक खराब।
ब्रेकडाउन ट्रेलर ने खोली सिस्टम की पोल, तस्करों के आगे बेबस दिखा तंत्र।
भानुमित्र संवाददाता।
हज़ारीबाग़ चरही बृहस्पतिवार की रात करीब 11 बजे हजारीबाग-रांची फोरलेन एनएच पर एक अवैध कोयला लदा ट्रेलर ब्रेकडाउन होने से लगभग एक घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। इस दौरान सड़क के एक छोर पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब दो किलोमीटर तक जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना ने अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले विभागों की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, बड़कागांव थाना क्षेत्र के सेहदा चपरी और गोंदलपुरा इलाके में संचालित अवैध कोयला कारोबार से जुड़ा ट्रेलर (जेएच 02 बीवी 9326) चरही रेलवे साइडिंग से फोरलेन एनएच पर चढ़ते ही अचानक खराब हो गया। ट्रेलर के सड़क पर खड़े हो जाने से वाहनों का आवागमन एक ही लेन से होने लगा, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेलर के फंसे रहने के दौरान कोयला कारोबार से जुड़े कई लोग मौके पर मौजूद थे और वाहन को हटाने के प्रयास में जुटे थे। वहीं सड़क से महज कुछ दूरी पर सीसीएल सुरक्षा विभाग की गश्ती टीम मौजूद रहने के बावजूद वाहन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना दिए जाने के बाद भी न तो वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और न ही सीसीएल सुरक्षा विभाग के अधिकारी। बताया जाता है कि चरही थाना की रात्रि गश्ती टीम भी मौके पर पहुंची थी, लेकिन उसका ध्यान केवल जाम हटवाने पर रहा। ट्रेलर को जब्त करने अथवा उसके कोयले की वैधता की जांच करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई। करीब रात 12 बजे ट्रेलर को किसी तरह ठीक कर मेवात होटल के समीप लाकर खड़ा कर दिया गया, जहां शुक्रवार शाम तक वाहन खड़ा रहने की बात सामने आई। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से चर्चाओं का बाजार गर्म है। गौरतलब है कि घटना स्थल से एक दिन पूर्व ही सीसीएल सुरक्षा टीम द्वारा अवैध कोयला लदे तीन ट्रेलरों को पकड़ा गया था और इस संबंध में थाना में मामला भी दर्ज कराया गया था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अवैध कोयला परिवहन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, तब खुलेआम सड़क पर खड़े एक संदिग्ध ट्रेलर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना केवल एक वाहन के ब्रेकडाउन की नहीं, बल्कि अवैध कोयला कारोबार के सामने प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी और उदासीनता को भी उजागर करती है। जिस तरह एक घंटे तक सड़क जाम रही और विभिन्न विभागों को सूचना मिलने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, उससे तस्करों का मनोबल बढ़ने और सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कोई जांच या कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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