आज़ादी के 79 साल बाद भी खाट पर ज़िंदगी! एंबुलेंस न आने से टूटती सांसें, गुस्से में ग्रामीणों ने चक्का किया जाम
मंगलवार, 7 जुलाई 2026
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महेशपुर : महेशपुर प्रखंड के सापाराम मोड़ पर मंगलवार को दीघा और मंदाडंगाल गांव के ग्रामीणों का वर्षों का आक्रोश आखिरकार सड़क पर उतर आया। सड़क निर्माण और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने सुबह करीब 9 बजे महेशपुर-गुम्मामोड़ मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों, वाहन चालकों तथा राहगीरों को घंटों भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि दीघा और मंदाडंगाल गांव की सड़क वर्षों से बदहाल स्थिति में है। बरसात के दिनों में यह सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि आज़ादी के बाद से अब तक उनके गांव में कभी पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मांग करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की बदहाल स्थिति का सबसे अधिक खामियाजा बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को उठाना पड़ता है। गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिसके कारण गंभीर मरीजों और प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को चारपाई या खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई मरीजों की जान भी जा चुकी है। प्रदर्शन में शामिल शीमती देवी, दरीमति मुर्मू, तेरेसा टुडू, कोकिला टुडू, प्यारी मरांडी, पांसुरी मुर्मू, होसोनी मरांडी, सुसाना हांसदा, बिटी हेंब्रम, गणेश राय, सामियल मरांडी, इनोसेंट हेंब्रम, मनोज किस्कू, चुंडा किस्कू सहित दर्जनों ग्रामीणों ने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण की ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना था कि जब तक संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर लिखित रूप से यह नहीं बताएंगे कि सड़क का निर्माण कब शुरू होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।ग्रामीणों ने सड़क के साथ-साथ पेयजल संकट का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि करीब एक हजार घरों की आबादी वाले इन गांवों में मात्र तीन चापाकल हैं, जिनमें से भी कई बार पानी नहीं निकलता। मजबूरी में लोग कुओं का गंदा पानी पीने को विवश हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है। मौके पर मौजूद पंचायत के मुखिया रवि हांसदा ने भी ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि दीघा और मंदाडंगाल गांव में सड़क निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पेयजल की समस्या भी गंभीर है और प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर दोनों समस्याओं का समाधान करना चाहिए। सड़क जाम की सूचना मिलने पर महेशपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि ग्रामीण अपने निर्णय पर अड़े रहे और कहा कि केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना था कि जब तक कोई वरीय प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर लिखित आश्वासन नहीं देंगे, तब तक जाम समाप्त नहीं किया जाएगा। खबर लिखे जाने तक महेशपुर-गुम्मामोड़ मुख्य सड़क पूरी तरह जाम थी। प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस ग्रामीणों से लगातार वार्ता कर सड़क जाम समाप्त कराने का प्रयास कर रहे थे, जबकि दूसरी ओर सड़क पर फंसे यात्रियों और वाहन चालकों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
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