कस्तूरबा विद्यालय में बीमार छात्रा घंटों बेहोश पड़ी रही, अभिभावक की सक्रियता से अस्पताल पहुंची रईसा परवीन
रविवार, 23 अगस्त 2026
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पाकुड़िया : प्रखंड के झरिया स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कक्षा 11वीं की 17 वर्षीय छात्रा रईसा परवीन के समय पर इलाज और उचित देखभाल नहीं मिलने का मामला सामने आया है। छात्रा के परिजनों ने विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि तबीयत खराब होने के बावजूद उसे समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। अत्यधिक कमजोरी के कारण छात्रा बेहोश हो गई और कई घंटे तक विद्यालय में ही पड़ी रही। बाद में सूचना मिलने पर परिजन विद्यालय पहुंचे और निजी वाहन की व्यवस्था कर छात्रा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाकुड़िया में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है।
बीमार छात्रा के चाचा नईम अंसारी ने बताया कि पलियादाहा निवासी उनकी भतीजी रईसा परवीन की तबीयत बीते दिन से ही खराब थी। रात में उसकी स्थिति और बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार छात्रा ने विद्यालय की वार्डन से अपनी तबीयत खराब होने की बात कही और इलाज कराने के लिए गुहार लगाई। उसने अपने पिता से मोबाइल पर बात कराने का भी अनुरोध किया, लेकिन आरोप है कि उसकी बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया गया और अभिभावक से उसकी बात नहीं कराई गई।
परिजनों का आरोप है कि रविवार की सुबह भी छात्रा ने वार्डन को अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी, लेकिन उसकी स्थिति को गंभीरता से लेने के बजाय बीमारी को नाटक बताकर नजरअंदाज कर दिया गया। आरोप है कि न तो समय पर इलाज की व्यवस्था की गई और न ही तत्काल छात्रा के अभिभावक को सूचना दी गई। इसके बाद छात्रा की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और वह बेहोश हो गई।
नईम अंसारी के अनुसार, छात्रा के होश में नहीं आने के बाद रविवार को करीब 11 बजे विद्यालय की ओर से अभिभावक को फोन कर उसके बीमार होने की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वह कुछ ही देर में झरिया स्थित कस्तूरबा विद्यालय पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी भतीजी को बेहोशी की हालत में देखा तो घबरा गए। उन्होंने विद्यालय में वार्डन से मिलने का प्रयास किया, लेकिन वार्डन बीमार छात्रा के पास मौजूद नहीं थीं और उनकी मुलाकात भी नहीं हो सकी।
नईम अंसारी ने बताया कि वार्डन से मुलाकात नहीं होने के बाद उन्होंने विद्यालय में मौजूद गार्ड से बीमार छात्रा को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने को कहा। आरोप है कि गार्ड ने वाहन की व्यवस्था करने में असमर्थता जताई। इसके बाद परिजनों ने किसी तरह निजी वाहन की व्यवस्था की और छात्रा को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाकुड़िया पहुंचे। परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने तक काफी समय बीत चुका था।
नईम अंसारी ने बताया कि जब वह विद्यालय पहुंचे, तब उनकी भतीजी बेहोशी की हालत में थी। विद्यालय की अन्य छात्राओं और रईसा के साथ रहने वाली छात्राओं ने भी उन्हें बताया कि छात्रा सुबह करीब 7 बजे से ही बेहोश पड़ी थी। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय पर इलाज और देखभाल मिलती तो छात्रा की स्थिति इस स्तर तक नहीं पहुंचती।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाकुड़िया के चिकित्सक डॉ. मंजर आलम ने बताया कि छात्रा का इलाज किया जा रहा है। उसे स्लाइन चढ़ाई गई और इलाज शुरू होने के कुछ ही देर बाद छात्रा को होश आ गया। चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।
घटना के बाद छात्रा के अभिभावकों में विद्यालय की व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। परिजनों ने मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं उपायुक्त से करने की बात कही है। परिजनों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और आवासीय विद्यालय में छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल एवं अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने की मांग की है।
बहरहाल, सरकार के पीएम श्री नामधारी इस विद्यालय में छात्राओं के स्वास्थ्य एवं देखभाल से जुड़ी व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद समय-समय पर उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि विद्यालय में सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सकें और किसी भी बीमार छात्रा को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
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