कोयला ढुलाई के रास्ते पर मौत, दो दिनों से न्याय और मुआवजे की आस में बैठा परिवार; कंपनी के अधिकारियों के नहीं पहुंचने से बढ़ा आक्रोश
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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अमड़ापाड़ा : कोयला ढुलाई की तेज आवाजाही के बीच सड़क सुरक्षा और प्रभावित परिवारों के प्रति जवाबदेही का सवाल एक बार फिर सामने आया है कोलखीपाड़ा मोड़ के पास शनिवार की रात करीब 12 बजे हुई सड़क दुर्घटना में प्रानिक टोला निवासी लगभग 35 वर्षीय निमुलाला मरांडी, पिता कारण मरांडी, की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक के परिजन मुआवजे, दोनों छोटे बच्चों की पढ़ाई और परवरिश के लिए आर्थिक सहायता तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि वे पिछले दो दिनों से सड़क पर बैठकर कंपनी प्रबंधन से बातचीत की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन सोमवार सुबह नौ बजे तक कंपनी का कोई अधिकारी ठोस बातचीत के लिए नहीं पहुंचा था। इससे परिवार की परेशानी के साथ-साथ ग्रामीणों में भी नाराजगी बढ़ गई है।
*घर लौटने का इंतजार करते रहे परिजन, दूसरे लोगों के व्हाट्सऐप समूह से मिली हादसे की सूचना*
निमुलाला मरांडी की मौत के बाद उनके परिवार की पीड़ा इस बात से और बढ़ गई कि उन्हें घटना की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। परिजनों के अनुसार, जब निमुलाला घर नहीं लौटे तो परिवार के सदस्य फोन के माध्यम से परिचितों और रिश्तेदारों से लगातार संपर्क करते रहे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद वह किसी परिचित के यहां चले गए होंगे। उस समय परिवार को यह जानकारी नहीं थी कि निमुलाला सड़क दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं और उनकी मौत हो गई है।
बताया जाता है कि कोयला ढुलाई मार्ग पर निगरानी के लिए तैनात कंपनी की गश्ती गाड़ी के कर्मियों की नजर सड़क पर पड़े शव पर पड़ी। इसके बाद शव को सदर अस्पताल, पाकुड़ ले जाया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान मृतक के परिजनों की आवश्यकता पड़ने पर परिवार को दूसरे लोगों के व्हाट्सऐप समूह के माध्यम से दुर्घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे। वहां अपने परिवार के सदस्य की मौत की खबर मिलने के बाद उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
*घटनास्थल से शव उठाने से पहले परिवार को सूचना क्यों नहीं दी गई?*
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शव को घटनास्थल से उठाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि आखिर परिवार को समय पर जानकारी क्यों नहीं दी गई और उन्हें दूसरे लोगों के व्हाट्सऐप समूह के माध्यम से हादसे की खबर क्यों मिली। परिजन दुर्घटना की परिस्थितियों, संबंधित वाहन की पहचान और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
हालांकि, दुर्घटना में किस वाहन की संलिप्तता थी और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल परिवार की प्रमुख मांग है कि घटना से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जाए और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
*दो दिनों से सड़क पर बैठे परिजन, कंपनी प्रबंधन से बातचीत का इंतजार*
निमुलाला मरांडी की मौत के बाद परिवार और ग्रामीण कंपनी प्रबंधन से बातचीत तथा उचित मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर बैठे हैं। परिजनों के मुताबिक, वे पिछले दो दिनों से अपनी मांगों के समर्थन में इंतजार कर रहे हैं। सोमवार सुबह नौ बजे तक कंपनी का कोई अधिकारी बातचीत के लिए नहीं पहुंचने की बात कही गई। इससे प्रभावित परिवार की चिंता और ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता गया।
ग्रामीणों का कहना है कि कोयला परिवहन से जुड़े मार्गों पर यदि कोई गंभीर दुर्घटना होती है तो प्रभावित परिवार की सहायता, घटना की जांच में सहयोग और सड़क सुरक्षा की समीक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि हादसे के बाद परिवार को अकेला छोड़ने के बजाय संबंधित पक्षों को आगे आकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए और नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए पहल करनी चाहिए।
हालांकि, इस मामले में कंपनी प्रबंधन की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और परिवार की मांगों पर उसका क्या रुख है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
*परिवार का सहारा छिना, दो छोटे बच्चों की पढ़ाई और परवरिश पर संकट*
निमुलाला मरांडी अपने परिवार के भरण-पोषण का मुख्य सहारा थे। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई का गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। दो छोटे बच्चों के भविष्य को लेकर परिजन चिंतित हैं। परिवार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की परवरिश, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना है।
इसी को ध्यान में रखते हुए परिजनों ने कंपनी प्रबंधन के सामने मांग रखी है कि दोनों बच्चों की पढ़ाई और परवरिश के लिए उचित आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही, परिवार के एक सदस्य को कंपनी में नौकरी उपलब्ध कराई जाए, ताकि परिवार को नियमित आय का सहारा मिल सके और बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने में मदद मिले।
परिजनों की मांग है कि सहायता केवल तत्काल राहत तक सीमित न रहे, बल्कि परिवार की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए। हालांकि, मुआवजे, आर्थिक सहायता और नौकरी से संबंधित मांगों पर किसी ठोस समझौते या आधिकारिक आश्वासन की पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हुई थी।
*कोयला परिवहन मार्गों की सुरक्षा पर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण*
अमड़ापाड़ा क्षेत्र में कोयला खनन और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों के बीच भारी वाहनों की आवाजाही तथा सड़क सुरक्षा का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है। कोलखीपाड़ा मोड़ पर हुई इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ऐसे मार्गों पर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम हैं और दुर्घटना होने की स्थिति में प्रभावित परिवार तक सूचना पहुंचाने तथा राहत उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन दुर्घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। संबंधित वाहन की पहचान की जाए, हादसे की परिस्थितियों का पता लगाया जाए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही कोयला परिवहन मार्गों पर सुरक्षा उपायों की समीक्षा कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात व्यवस्था तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इससे आम लोगों की जिंदगी और परिवारों का भविष्य भी जुड़ा है। इसलिए दुर्घटना के बाद जांच, सूचना, जवाबदेही और प्रभावित परिवार को राहत देने की प्रक्रिया में संवेदनशीलता और तत्परता जरूरी है।
*अब परिवार को न्याय और राहत मिलने का इंतजार*
निमुलाला मरांडी की मौत से उनका परिवार गहरे संकट में है। एक ओर परिजन अपने प्रियजन को खोने के दुख से गुजर रहे हैं, तो दूसरी ओर बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और परिवार के भरण-पोषण की चिंता उनके सामने खड़ी है। इसी बीच कंपनी प्रबंधन से बातचीत नहीं होने की बात ने ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ा दी है।
समाचार लिखे जाने तक परिजनों की मांगों पर किसी ठोस समझौते या आश्वासन की पुष्टि नहीं हुई थी। दुर्घटना की परिस्थितियों और संबंधित वाहन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि भी जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब सवाल यह है कि निमुलाला मरांडी के परिवार को राहत दिलाने, बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने और दुर्घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित पक्ष कब ठोस कदम उठाएंगे। कोयला परिवहन से जुड़े मार्गों पर सुरक्षा और दुर्घटना के बाद जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े।
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