झारखंड में शराब से रिकॉर्ड राजस्व, सरकार को मिले 4000 करोड़ से ज़्यादा का फायदा
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026
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रवि फिलिप्स (ब्यूरो चीफ धनबाद) भानुमित्र न्यूज़🖋️
झारखंड सरकार को वित्तीय वर्ष 2025–26 में शराब की बिक्री से रिकॉर्ड राजस्व मिला है। सरकार के अनुमान से काफ़ी ज़्यादा होने के कारण इसे उत्पाद विभाग के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
4000 करोड़ से ज़्यादा का राजस्व
सरकार के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025–26 (अप्रैल 2025–मार्च 2026) में शराब से लगभग 4013.53 करोड़ रुपये का राजस्व जमा हुआ है। सरकार ने पिछले साल इस मद से महज 3585 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, लेकिन वास्तविक आमदनी उससे लगभग 428 करोड़ रुपये ज़्यादा रही। यानी शराब से मिला राजस्व लक्ष्य से लगभग 112% अधिक हो गया।
नई उत्पाद नीति की भूमिका
सितंबर 2025 से लागू नई उत्पाद नीति ने यह बदलाव लाया कि शराब की बिक्री अब निजी आउटलेट्स और खुदरा विक्रेताओं के ज़रिए चल रही है। इस बदलाव के बाद केवल तीन महीने में ही उत्पाद विभाग को 1400 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जमा हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी लाइसेंसिंग और ई–ऑक्शन के ज़रिये टैक्स बेस भी मज़बूत हुआ है।
बिहार की शराबबंदी का प्रभाव
बिहार में शराबबंदी के बाद पड़ोसी राज्य से आने वाले लोगों की मांग ने झारखंड में दारू की बिक्री को और बढ़ावा दिया। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों में ही एक–एक दिन में 65 करोड़ रुपये तक का राजस्व जैसे रिकॉर्ड आंकड़े सामने आए, जिससे सरकारी खज़ाना और भी भरा।
आगामी लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए उत्पाद विभाग ने शराब से राजस्व लक्ष्य 4250 करोड़ रुपये तय किए हैं, जिसे वित्त विभाग 4500 करोड़ से अधिक तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यह वित्तीय वर्ष झारखंड के लिए न सिर्फ राजस्व की दृष्टि से बल्कि नीतिगत परिवर्तनों की दृष्टि से भी यादगार माना जा रहा है।
इस तरह, इस साल झारखंड सरकार को दारू की बिक्री से करीब 4000 करोड़ रुपये के आसपास का फायदा हुआ है, जो पिछले सालों की तुलना में सबसे बड़ा हासिल है। वहीं, विशेषज्ञों की निगाह अब उस दिशा पर है कि यह राजस्व बढ़ने के साथ–साथ समाज पर शराब के स्वास्थ्य और नैतिक असरों पर भी निगरानी बनी रहे।
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