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“दो महीने से बिना वेतन के ड्यूटी कर रही है झारखंड पुलिस, जवानों के सामने आया आर्थिक संकट”

“दो महीने से बिना वेतन के ड्यूटी कर रही है झारखंड पुलिस, जवानों के सामने आया आर्थिक संकट”

                        file photo 

रवि फिलिप्स (ब्यूरो चीफ धनबाद) भानुमित्र न्यूज़🖋️
झारखंड पुलिस के हजारों जवान इन दिनों लगातार दो महीने से बिना वेतन के ड्यूटी करने को मजबूर हैं। फरवरी और मार्च का वेतन लंबित होने से निचली कड़ी के पुलिसकर्मियों के परिवारों को रोजमर्रा की जिंदगी चलाने में गहरी दिक्कत हो रही है।  

ट्रेजरी घोटाले की वजह से रुका वेतन 

ट्रेजरी में हुई कथित गड़बड़ी और 30 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के घोटाले के बाद वित्त विभाग ने सभी पुलिसकर्मियों की वेतन निकासी प्रक्रिया रोक दी है। इसके चलते राज्य भर के करीब 65 हजार से अधिक पुलिस अधिकारी और जवानों का वेतन अटका है।  




परिवारों में तनाव और त्याग  

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बहुत से पुलिस परिवारों ने इस महीने होने वाली शादियों, जन्म‑कर्म और अन्य सामाजिक कार्य स्थगित कर दिए हैं। आर्थिक तंगी के कारण कई जवानों ने निजी कर्ज लेने की दिशा में कदम भी उठाया है, जो भविष्य में उन पर भारी पड़ सकता है।  

ड्यूटी और मनोबल पर असर 

पुलिस एसोसिएशन का कहना है कि लगातार वेतन न मिलने से न सिर्फ जवानों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि उनकी कार्यकुशलता और कानून‑व्यवस्था की जिम्मेदारी भी प्रभावित हो सकती है। संगठन का मानना है कि ट्रेजरी या वेतन प्रणाली की जाँच तो जरूरी है, लेकिन उसे “सामूहिक सज़ा” की तरह नहीं भुगतान के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए।  

सरकार से स्पष्ट मांग  

इस मुद्दे पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर तत्काल वेतन जारी करने, फरवरी–मार्च का बकाया भुगतान करने और भविष्य में इस तरह की देरी न हो, इसके लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।  

सरकारी वृत्तों का कहना है कि वित्त विभाग ट्रेजरी घोटाले और वेतन निकासी प्रक्रिया की समीक्षा के बाद ही भुगतान फिर से शुरू करेगा लेकिन इस आर्थिक निर्णय ने पुलिस के सबसे कमजोर स्तर पर खड़े जवानों को सबसे ज्यादा झटका पहुँचाया है।  


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