"सिंदरी को बचाना है तो 2003 से सीखो: एकजुट ना हुए तो अंधेरा पक्का!"- डीएन सिंह..सिंदरी फिर संघर्ष के मोड़ पर: 2003 की याद दिलाता आज का खतरा.
मंगलवार, 19 मई 2026
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रवि फिलिप्स (ब्यूरो चीफ धनबाद) भानुमित्र न्यूज़🖋️
सिंदरी:कभी भारत के ‘खाद उद्योग का गर्व’ कहलाने वाला सिंदरी आज फिर उसी संकट के दौर से गुजर रहा है, जिसमें वह 2003 में फंस गया था। एफसीआई सिंदरी प्लांट के पूर्व अधिकारी वरिष्ठ नागरिक और सिंदरी फैमिली के अध्यक्ष डी. एन. सिंह ने बताया कि पानी और बिजली बंद होने से तब पूरा सिंदरी सड़कों पर उतर आया था। धनबाद के बैंक मोड़ पर स्कूल और दुकानें बंद हो गई थीं, गर्मी से नौजवान बेहोश हो रहे थे। उस आंदोलन के बाद केंद्र और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से सिंदरी को राहत मिली थी।
आज वही तस्वीर बनती दिख रही है। डी. एन. सिंह के अनुसार, डोमगढ़, मनोहरटार और एसएल-2 के लगभग 1300 क्वार्टर पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। पानी, बिजली और रोजगार को लेकर लोगों में फिर बेचैनी बढ़ रही है। उनका कहना है कि 2003 का आंदोलन आज के नेताओं के लिए एक ब्लूप्रिंट है—एकजुटता, संघर्ष और संवाद के जरिए ही समाधान निकला था।
संस्थान टूट रहे, लापरवाही बढ़ रही
डी. एन. सिंह ने स्थिति को लेकर कई बिंदु उठाए:
- 205 बेड का सिंदरी अस्पताल आज भी बंद पड़ा है। इसे संचालित करने के लिए कोई एजेंसी तैयार नहीं है।
- 7-8 स्कूलों की अच्छी इमारतें खाली पड़ी हैं, ताले लटके हैं। एफसीआईएल अब मुनाफे में है, लेकिन स्थानीय विकास में उसका योगदान नगण्य बताया जा रहा है।
- एचयूआरएल का पूरा ध्यान उत्पादन पर है, सिंदरी के नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं पर नहीं।
- सबसे बड़ी चिंता बिजली की है। 75 साल बाद भी सिंदरी को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी टाउनशिप को पानी देने का दावा करती है, जबकि सिंदरी को पानी 1952 से मिल रहा है। “आजादी 1947 में मिली थी, उसके बाद नहीं,” डी. एन. सिंह ने कहा।
समय की मांग: एकजुटता
डी. एन. सिंह का मानना है कि अगर 2003 जैसा जज्बा फिर नहीं दिखा, तो सिंदरी का भविष्य फिर अंधकार में चला जाएगा। उन्होंने नेताओं से अपील की है कि सभी पक्षों को साथ लेकर संवाद करें और पुराने आंदोलन से सीख लेकर ठोस कदम उठाएं।
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