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"2003 में  एकजुटता ने सिंदरी को बचाया था, 2026 में वही ऐतिहासिक जिम्मेदारी फिर..FCI टाउनशिप के हस्तांतरण पर प्रशासन और प्रबंधन के सामने पारदर्शिता की परीक्षा"

"2003 में एकजुटता ने सिंदरी को बचाया था, 2026 में वही ऐतिहासिक जिम्मेदारी फिर..FCI टाउनशिप के हस्तांतरण पर प्रशासन और प्रबंधन के सामने पारदर्शिता की परीक्षा"



सिंदरी: 1951 में देश के पहले सरकारी उर्वरक कारखाने के साथ बसी एशिया की सबसे बड़ी प्लान्ड टाउनशिप आज निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। FCI सिंदरी की डोमगढ़, गोशाला, मनोहरताड़ और NAC कॉलोनी की जमीनों के हस्तांतरण की प्रक्रिया 2025 में शुरू होकर 2026 में अंतिम चरण में पहुंच गई है। अब यह प्रशासन और प्रबंधन दोनों के सामने सीधा सवाल है—विकास की गति के साथ 60 साल से बसी आबादी का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा।
 डोमगढ़ की 304 एकड़ जमीन सेल के टासरा प्रोजेक्ट को सौंपी जा चुकी है—60 एकड़ पहले चरण में, 134 एकड़ सितंबर 2025 तक, और अंतिम 110 एकड़ दिसंबर 2025 तक। गोशाला की 85 एकड़ भी सेल के पास जा चुकी है।
 डोमगढ़ के DL, DL-2, DK-4, CT, DV, खटाल की करीब 15,000 आबादी अब भी पुनर्वास की प्रतीक्षा में है। मनोहरताड़ के 463 आवास और SL-2 के 112 आवासों को 15 दिन में खाली करने का नोटिस मिला इन क्षेत्रों के लोग भी पुनर्वास की स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।
 डोमगढ़ और गोशाला में मकान-दुकान चलाने वाले 317 के आसपास कब्जाधारकों को पीपी कोर्ट ने खाली करने का आदेश दिया है।
 FCI प्रबंधन द्वारा डोमगढ़, रोहडाबांध, शहरपुरा, रांगामाटी, मनोहर टांड़ और SL-2 के आवासों में रह रहे लोगों को 15 दिन में खाली करने का नोटिस जारी होने के बाद सिंदरी में बड़ा जुलूस निकाला गया। कौशल सिंह ने कहा  था कि लोग आवास लेने को तैयार हैं, लेकिन नई आवास नीति से सहमत नहीं।
  दिसंबर 2025 मै सिंदरी बचाओ संघर्ष मोर्चा के संरक्षक विधायक चंद्रदेव महतो के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 18 दिसंबर 2025 को FCI प्रबंधन से मुलाकात की। सहमति बनी कि डोमगढ़ और आवास नीति पर दिल्ली से अंतिम फैसला आने तक यथास्थिति बनी रहेगी।
     “डोमगढ़ बचाओ मोर्चा” ने  हजारो आवास- और झुग्गी के लिए धरना दिया था लूस निकाले।  नोटिस के खिलाफ ज्वाइंट पीटीशन अदालत में लंबित है।
-पुनर्वास नीति अब भी अधूरी: 60 साल से बसे परिवारों के लिए ठोस पुनर्वास योजना सामने नहीं आई।

2003 की मिसाल—जब संवाद ने रास्ता निकाला था
 2003 में जब सिंदरी के भविष्य पर संशय था, तब जनता और स्कूल के बच्चों ने बैंक मोड़, धनबाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उस सामूहिक संवाद के बाद सिंदरी को फिर से गुलजार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। यह उदाहरण बताता है कि जब प्रशासन और जनता एक मंच पर आते हैं, तो समाधान संभव है।

स्थानीय प्रतिनिधियों के विचार:
  अजय सिंह, महासचिव, कांग्रेस धनबाद जिला:  ने कहा 
“2003 की लड़ाई में FCI से जुड़े लोग बड़ी संख्या में थे, लेकिन आज की लड़ाई में FCI से जुड़े लोगों की संख्या कम है। फिर भी उनके आशियाने को बचाने के लिए हम पूरा सहयोग करेंगे।”
डोमगढ़ बचाव एकता अभियान के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, ने कहा 
“डोमगढ़ के आवास के नीचे कोई भी राजस्व नहीं है। मैनेजमेंट जानबूझकर षड्यंत्र कर रहा है। यहां 60-70 वर्षों से लोग रह रहे हैं। डोमगढ़ किसी भी कीमत पर खाली नहीं करेंगे। अगर मैनेजमेंट अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो जोरदार आंदोलन होगा।”

भाकपा माले के युवा नता जितेंद्र शर्मा ने कहा 
“2003 में सिंदरी की जनता और स्कूल के बच्चों ने बैंक मोड़ पर प्रदर्शन किया था, जिससे सिंदरी को बचाने की दिशा मिली। प्रशासन ने तब संवाद का रास्ता अपनाया था। आज फिर वही समझदारी चाहिए।”
                        राजन कुमार: ने कहा
“2003 की एकजुटता ने बड़ा फर्क डाला। 2026 में भी उसी सहयोग और जवाबदेही की जरूरत है।”
डी. एन. सिंह, सिंदरी फैमिली के अध्यक्ष ने कहा 
“लगभग 7000 एकड़ जमीन FCI को उनके उपयोग के लिए दी गई थी। यदि अब आवश्यकता नहीं है, तो मूल मालिकों को वापस करना ही उचित होगा। डोमगढ़ में चौथी-पांचवीं पीढ़ी रह रही है। पहले पुनर्वास पूरी तरह पुख्ता हो, तभी विस्थापन की बात हो। यही नीति मनोहरताड़ और SL2 पर भी लागू हो।”
सनोज सिंह, सिंदरी निवासी ने कहा 
“FCI प्रबंधन द्वारा आवास खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है। यदि विस्थापन होता है तो लोगों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था होनी चाहिए, जैसे झरिया में किया गया।”
गार्गी सिंह ने कहा 
“HURL हो या FCI, बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी को हटाना प्रशासनिक रूप से उचित नहीं। लोगों ने इन घरों की देखभाल की है। चार साल में HURL ने सिंदरी के लिए बड़े कदम नहीं उठाए, फंड का उपयोग स्पष्ट नहीं। सरकार देश में सभी को आवास दे रही है, यहां भी समाधान निकले। सिंदरी की जनता एकजुट होकर बात रखेगी, तो प्रशासन और मैनेजमेंट भी सकारात्मक कदम उठाएंगे।”


अब निर्णायक घड़ी:
टासरा प्रोजेक्ट आगे बढ़ चुका है और डोमगढ़-गोशाला का बड़ा हिस्सा सेल को हस्तांतरित हो गया है। विधायक की  वार्ता से यथास्थिति की सहमति मिली है, लेकिन स्थायी समाधान अब भी लंबित है। 60 साल से बसी आबादी के लिए पारदर्शी पुनर्वास नीति बनाना अब प्रशासन और प्रबंधन दोनों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है।

सिंदरी के लोग 2003 की मिसाल को याद करते हुए कह रहे हैं:  
संवाद और समाधान से आगे बढ़ेंगे, सिंदरी का भविष्य साथ बनाएंगे

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