सिंदरी: स्वर्णिम युग से प्रदूषण के साये तक, स्थानीय लोगों ने उठाए HURL और SAIL पर सवाल। सिंदरी फैमिली के अध्यक्ष डी. एन. सिंह बोले - फैक्ट्री चालू है, लेकिन सिंदरी को क्या मिला? अब कोल वाशरी से बढ़ेगा संकट
सोमवार, 18 मई 2026
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रवि फिलिप्स (ब्यूरो चीफ धनबाद) भानुमित्र न्यूज़🖋️
सिंदरी। झारखंड के सिंदरी का इतिहास दो हिस्सों में बंटा है - 1950 से 2000 तक का स्वर्णिम काल, और 2000 के बाद शुरू हुआ गिरावट का दौर। 31 दिसंबर 2002 को बंद हुई पुरानी फैक्ट्री के बाद 1 जनवरी 2003 से सिंदरी के लोगों के लिए संघर्ष का दौर शुरू हुआ।
सिंदरी फैमिली के अध्यक्ष डी. एन. सिंह का कहना है कि "उन दिनों अस्तित्व बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। तत्कालीन सांसद रीता वर्मा के सहयोग और स्थानीय लोगों की एकजुटता से ही क्वार्टर और लोग बच पाए।"
HURL से स्थानीय लोगों को क्या मिला?
सिंदरी में HURL के शुरू होने और सालाना 12-13 लाख टन यूरिया उत्पादन के बावजूद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। डी. एन. सिंह ने सवाल उठाया, "फैक्ट्री सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन HURL ने सिंदरी के लोगों के लिए क्या किया? कितने स्थानीय लोगों को स्थायी या संविदा पर नौकरी मिली? अगर नियुक्तियां हुई हैं तो आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?"
SAIL की कोल वाशरी से बढ़ी चिंता
अब SAIL द्वारा FCIL परिसर में बड़ी क्षमता की कोल वाशरी लगाने और डोमगढ़ क्षेत्र में ओबी डंपिंग की योजना ने नई चिंता पैदा कर दी है। सिंह का कहना है, "टाउनशिप के बीचों-बीच कोल वाशरी लगने से कोयले की महीन धूल पूरे इलाके में फैलेगी। यह प्लांट टाउनशिप के किनारे लगना चाहिए था।"
उनके अनुसार, सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट के पुराने दिन फिर लौटेंगे। "हमारे भाग्य में सिर्फ प्रदूषण है। पहले OB डंपिंग होगी, फिर कोयला और धुले हुए कोयले का परिवहन शुरू होगा। भारी वाहन और ट्रक पूरे इलाके में चलेंगे।"
स्थानीय लोगों को आशंका है कि मनोहरतर और SL2 कॉलोनी भी कोयला डंपिंग के लिए प्रभावित हो सकती है। सिंह ने डोमगढ़ के नेतृत्व से अपील की कि वे मनोहरतर और SL2 के लोगों के साथ मिलकर आंदोलन को मजबूत करें। "ऐसे आंदोलन में ताकत और संख्या मायने रखती है," उन्होंने कहा।
प्रशासन से सवाल
सिंह ने सवाल उठाया कि SAIL को टाउनशिप के बीच कोल वाशरी लगाने की मंजूरी प्रदूषण और पर्यावरण विभाग से कैसे मिली। उन्होंने कहा कि अब सिंदरी के लोगों को अपने हक के लिए एकजुट होना होगा, वरना आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ धूल और बीमारी मिलेगी।
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