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सीसीएल ने पकड़ी कोयले की अवैध खेप, चार घंटे तक न पुलिस पहुंची न वन विभाग। सिस्टम फेल: रात 2:30 बजे तीन ट्रक में लदे 180 टन चोरी का कोयला पकड़ाया।

सीसीएल ने पकड़ी कोयले की अवैध खेप, चार घंटे तक न पुलिस पहुंची न वन विभाग। सिस्टम फेल: रात 2:30 बजे तीन ट्रक में लदे 180 टन चोरी का कोयला पकड़ाया।

भानुमित्र संवाददाता।

हज़ारीबाग़ चरही थाना क्षेत्र रेलवे साईडिंग के पास से राज्य की खनिज संपदा पर डाका डालने वाले अवैध कोयला कारोबार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा गुरुवार को चरही में हुई कार्रवाई ने कर दिया। सीसीएल हजारीबाग एरिया चरही की सुरक्षा टीम ने चरही रेलवे साइडिंग के समीप तीन 22 चक्का ट्रकों को पकड़ा, जिनमें करीब 180 टन अवैध स्टीम कोयला लदा था। लेकिन इस कार्रवाई से ज्यादा चर्चा उस सवाल की हो रही है कि आखिर जंगल के भीतर से 180 टन कोयला निकालकर मुख्य सड़क तक पहुंचाने वालों पर निगरानी रखने वाली एजेंसियां उस समय कहां थीं। जानकारी के अनुसार बुधवार देर रात करीब 2:30 बजे सीसीएल सुरक्षा विभाग को सूचना मिली कि बड़कागांव थाना क्षेत्र के बादाम-जोराकाठ मार्ग से - अवैध कोयले की बड़ी खेप चरही रेलवे साइडिंग के रास्ते बाहर भेजी जा रही है। सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मियों ने घेराबंदी - कर तीनों ट्रकों को पकड़ लिया। प्रत्येक वाहन में लगभग 60-60 टन कोयला लदा था, जिसकी कीमत लाखों रुपए बताई जा रही - है। बता दें कि बड़कागांव थाना क्षेत्र के सईदा, चपड़ी, जोराकाठ और गोंदलपुरा के जंगलों में लंबे समय से अवैध खनन जारी है और प्रतिदिन लगभग 10 ट्रक कोयला बिहार, उत्तर प्रदेश तथा रामगढ़ के विभिन्न औद्योगिक - फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में - सवाल उठ रहा है कि यदि वन क्षेत्र से रोज भारी वाहन गुजर रहे हैं, तो निगरानी तंत्र आखिर क्या कर रहा है। तीनों ट्रकों में 60-60 टन कोयला अवैध रूप से लदा था। वाहनों को पकड़ने के बाद सीसीएल सुरक्षा विभाग ने वन विभाग, पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। आरोप है कि सूचना के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। निहत्थे सीसीएल सुरक्षा कर्मी चार घंटे तक जब्त वाहनों की निगरानी करते रहे। अंततः सुबह करीब सात बजे चरही थाना प्रभारी अजीत कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे और तीनों ट्रेलरों को जब्त कर। रामगढ़ डीएफओ नीतीश कुमार ने पुलिस को सूचना देने की बात कहकर जिम्मेदारी पुलिस के पाले में डाल कर बात टाल दी। वहीं मांडू रेंजर बटेश्वर पासवान ने बिना पुलिस सुरक्षा के मौके पर जाने में असमर्थता जाहिर की। चरही वन क्षेत्र के प्रभारी वनपाल सुनील कुमार ने कहा कि पुलिस पहुंचने के बाद ही वन विभाग की टीम कार्रवाई के लिए जाएगी, लेकिन पहुंचा कोई नहीं। थाना ले गए। पुलिस ने कांड संख्या 48/26 दर्ज कर एक चालक को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया है। वाहन मालिकों, चालकों और अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच इस बात की भी हो रही है कि कोयला कहां से निकाला गया और इसकी डिलीवरी कहां होनी थी। इस पूरे मामले में वन विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। सबसे बड़ा सवाल जंगल के भीतर से 180 टन कोयला निकलकर सड़क तक पहुंच जाए, तीन विशाल ट्रक कई किलोमीटर की दूरी तय कर लें और जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचने से पहले बहाने तलाशते रहें, तो सवाल केवल तस्करों पर नहीं उठते। सवाल उस निगरानी तंत्र पर भी खड़े होते हैं जिसे जंगल, खनिज संपदा और कानून की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है

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