साढ़े तीन गुना किराया बढ़ोतरी ने तोड़ दिए 70 साल के गम के ताले। 2003 दोहराएंगे, एकता से FCI को झुकाएंगे - कांति सिंह
गुरुवार, 16 जुलाई 2026
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सिंदरी: 1 अगस्त से एफसीआईएल प्रबंधन का नया फरमान लागू होने वाला है। सिंदरी के 432 आवासों का किराया करीब साढ़े तीन गुना बढ़ा दिया गया है। LIC, बैंक, पुलिस, स्कूल, कॉलेज, डाकघर, BCCL, HURL और SAIL के कर्मचारियों द्वारा उपयोग किए जा रहे इन क्वार्टरों का नया रेट ₹6.50 प्रति वर्ग फुट तय किया गया है।
नई दरों के अनुसार F टाइप ₹9,750, J टाइप ₹7,800, K/1 टाइप ₹5,850, RM/K/4 टाइप ₹4,550 और L टाइप ₹3,250 प्रति माह देना होगा। इसके अलावा निगम शुल्क और जल शुल्क अलग से।
कभी-कभी जुल्म इतना बढ़ जाता है कि वो खुद लोगों को जोड़ देता है। FCI मैनेजमेंट का 70 साल पुराने जर्जर क्वार्टरों का किराया बढ़ाने का फैसला ऐसा ही एक फैसला साबित हुआ। जिस किराये से मैनेजमेंट ने सिंदरी को तोड़ने की सोची, उसी ने पूरे सिंदरी को एक कर दिया।
"ये लड़ाई अब आर-पार की है" - कांति सिंह
बाबू कुंवर सिंह समिति की महासचिव कांति सिंह की आवाज में आज सिंदरी का दर्द और जज्बा दोनों सुनाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, "बहुत अच्छा किया FCI ने। इस साढ़े तीन गुना बढ़ोतरी ने सभी सिंदरी वासियों को एक माला में पिरो दिया है। अब 2003 की तरह हम फिर एकजुट होंगे और जीतकर रहेंगे।"_
कांति सिंह ने ललकारते हुए कहा, _"अब हमें वही युद्ध लड़ना है जो हमारे पुरखों ने अंग्रेजों से लड़ा था। कंधे से कंधा मिलाकर। सिंदरी के लोगों में एकता नहीं थी, इसलिए मैनेजमेंट सालों से हमारा शोषण-दमन करती रही। अब बस। अब सिंदरी को एक होकर कूच करना है।"_
11 महीने की लीज तोड़ो, लॉन्ग लीज लो
उन्होंने जनता से आह्वान किया कि 11 महीने की लीज के चक्रव्यूह को तोड़ना होगा। बोकारो की लीज पॉलिसी को आधार बनाकर इन जर्जर मकानों को पुराने रेट पर लॉन्ग लीज यानी पट्टे पर लेना होगा।
"उर्वरक मंत्रालय को पत्र लिखेंगे। अपने सांसद के साथ केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा जी से मिलेंगे। हक मांगेंगे ।"
"शून्य कीमत पर अत्याचार नहीं सहेगा सिंदरी"
कांति सिंह ने कहा, "70 साल पहले का क्वार्टर, जिसकी आज कीमत शून्य है। कानून, गरीबी और बेरोजगारी से जूझता ये शहर। 75,000 की आबादी के बाद भी यहां कोई रोजगार नहीं। ऐसे में 5 रुपये 60 पैसे प्रति स्क्वायर फीट का रेट भी अन्याय है। गरीब से उसका घर मत छीनो।"
एफसीआईएल के इस फैसले से हजारों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस पर क्या कदम उठाते हैं।
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