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एफसीआईएल ने मनोहरटांड और एसएल-2 कॉलोनी के क्वार्टर तोड़ने के लिए 60 लाख रुपये का टेंडर जारी किया, दूसरी ओर उसी मनोहरटांड में झारखंड सरकार के मद से नाली निर्माण जारी, कांग्रेस के जिला महासचिव अजय सिंह ने जताई आपत्ति

एफसीआईएल ने मनोहरटांड और एसएल-2 कॉलोनी के क्वार्टर तोड़ने के लिए 60 लाख रुपये का टेंडर जारी किया, दूसरी ओर उसी मनोहरटांड में झारखंड सरकार के मद से नाली निर्माण जारी, कांग्रेस के जिला महासचिव अजय सिंह ने जताई आपत्ति

 सिंदरी:सिंदरी के मनोहरटांड कॉलोनी में दो सरकारी संस्थाओं के परस्पर विरोधी निर्णयों ने विकास योजनाओं की समन्वयहीनता को उजागर कर दिया है। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहरा गई है, बल्कि स्थानीय नागरिकों में भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

प्रकरण का तथ्यात्मक पक्ष
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एफसीआईएल) द्वारा टेंडर संख्या 56996202 जारी किया गया है। इस टेंडर के अंतर्गत मनोहरटांड एवं एसएल-2 कॉलोनी के जर्जर क्वार्टरों के ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) का कार्य प्रस्तावित है। उक्त टेंडर की अनुमानित लागत लगभग 60 लाख रुपये है तथा इसकी निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 03 सितंबर, 2026 निर्धारित की गई है।

दूसरी ओर, इसी मनोहरटांड कॉलोनी में, वार्ड संख्या 53 के अंतर्गत, धनबाद नगर निगम द्वारा नाली निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार यह कार्य झारखंड सरकार के आवंटित निधि से किया जा रहा है तथा कार्य वार्ड पार्षद की देखरेख में संचालित बताया जा रहा है।

समन्वय का अभाव या अदूरदर्शिता?

स्वाभाविक प्रश्न यह उठता है कि जब संबंधित भू-भाग पर स्थित आवासों को ही ध्वस्त किया जाना प्रस्तावित है, तो उसी स्थल पर स्थायी प्रकृति के नाली निर्माण का औचित्य क्या है? यदि भविष्य में एफसीआईएल द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है, तो नवनिर्मित नाली भी स्वतः क्षतिग्रस्त हो जाएगी, जिससे राजकोष को क्षति पहुंचेगी।

कांग्रेस के जिला महासचिव अजय सिंह की प्रतिक्रिया

इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के धनबाद जिला महासचिव अजय सिंह ने कहा, “यह अत्यंत गंभीर विषय है। एक ओर केंद्र सरकार का उपक्रम एफसीआईएल क्वार्टरों को तोड़ने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार की निधि से उसी स्थान पर नाली बनाई जा रही है। यह स्थिति दो विभागों के बीच समन्वय के अभाव को दर्शाती है और अंततः नुकसान जनता के कर से अर्जित धन का होगा।

श्री सिंह ने आगे कहा, “हमारा विरोध किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि व्यवस्था की इस विसंगति से है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस कार्य का संपूर्ण वर्क ऑर्डर, प्राक्कलन और व्यय विवरण सार्वजनिक करे तथा जब तक दोनों विभागों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कार्य पर पुनर्विचार किया जाए।”

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर उचित समन्वय स्थापित किया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया अपेक्षित
 इस संबंध में नगर निगम एवं एफसीआईएल दोनों पक्षों से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास किया है। दोनों विभागों से उत्तर प्राप्त होते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। समाचार का उद्देश्य किसी पर आक्षेप लगाना नहीं, अपितु जनहित से जुड़े विषय को प्रशासन के समक्ष रखना है।

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