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अनुच्छेद 342 में संशोधन और डी-लिस्टिंग की मांग को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच ने तेज किया आंदोलन

अनुच्छेद 342 में संशोधन और डी-लिस्टिंग की मांग को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच ने तेज किया आंदोलन

पाकुड़िया : प्रखंड क्षेत्र के तलवा में जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें मंच के संथाल परगना प्रांत संयोजक सुलेमान शंकर मुर्मू ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए संगठन की आगामी रणनीति और विभिन्न मांगों की जानकारी दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन तथा अनुसूचित जनजाति की सूची से धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को अलग करने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही गई।

प्रांत संयोजक सुलेमान शंकर मुर्मू ने 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित ‘जनजाति संस्कृति समागम’ के संदेश का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन लंबे समय से जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा, रूढ़ि-प्रथा और आस्था की रक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी मांग उठा रहा है।

 धर्म परिवर्तन को लेकर आरक्षण के लाभ पर रोक की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुलेमान शंकर मुर्मू ने धर्म परिवर्तन को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि देशभर में धर्मांतरण का बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल अंकुश लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो अनुसूचित जनजाति के लोग अपनी मूल परंपरा, संस्कृति, रूढ़ि-प्रथा और आस्था को छोड़ चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित सरकारी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संगठन की प्रमुख मांग है कि ऐसे लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से अलग करने के लिए आवश्यक संवैधानिक प्रावधान किए जाएं। इसी मांग को संगठन ‘डी-लिस्टिंग’ के नाम से आगे बढ़ा रहा है।

 चर्चों को लेकर मंच ने रखी मांग

सुलेमान शंकर मुर्मू ने दावा किया कि पूरे जिले में अनुसूचित जनजाति समुदाय के 10 प्रतिशत से अधिक लोग ईसाई बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि संगठन ने निर्णय लिया है कि जिन गांवों में आधिकारिक रूप से ईसाई आबादी 2 प्रतिशत से कम है, वहां स्थित चर्चों को तत्काल हटाया जाना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर भी संगठन की ओर से अपनी मांग को आगे बढ़ाने की बात कही गई।

 ‘ग्राम देवदर्शन’ कार्यक्रम के जरिए जागरूकता अभियान

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि संथाल परगना क्षेत्र में विशेष रूप से संथाल और पहाड़िया जनजाति के लोग निवास करते हैं। जनजाति सुरक्षा मंच अब इन समुदायों के आस्था स्थलों और धर्म स्थलों तक पहुंचकर ‘ग्राम देवदर्शन’ कार्यक्रम चलाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से जनजातीय समाज के लोगों को अपनी संस्कृति, परंपरा और आस्था से जुड़े विषयों के साथ-साथ डी-लिस्टिंग के मुद्दे पर जागरूक और सजग करने का प्रयास किया जाएगा।

मंच की ओर से कहा गया कि संगठन का उद्देश्य जनजातीय समाज के बीच पहुंच बढ़ाकर लोगों को उनके अधिकारों और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक करना है। इसके लिए गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

 अनुच्छेद 342 में संशोधन तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प

प्रांत संयोजक सुलेमान शंकर मुर्मू ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन नहीं किया जाता, तब तक जनजाति सुरक्षा मंच का आंदोलन देश और प्रांत स्तर पर लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की मांगों को लेकर समाज के बीच सक्रिय रहने और लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संगठन के कई स्थानीय पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। मंच ने आगामी दिनों में अपने कार्यक्रमों और जनजागरूकता अभियान को और व्यापक स्तर पर संचालित करने की बात कही।

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