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धनबाद में 'क्लीन एयर संवाद 2026' का आयोजन, बंद खदानों के पुनरुद्धार पर दिया जोर

धनबाद में 'क्लीन एयर संवाद 2026' का आयोजन, बंद खदानों के पुनरुद्धार पर दिया जोर


रवि फिलिप्स  (ब्यूरो चीफ धनबाद) भानुमित्र न्यूज़🖋️
धनबाद: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम) धनबाद और असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को आईआईटी (आईएसएम) परिसर में ‘क्लीन एयर संवाद 2026: स्वच्छ हवा, स्वस्थ समुदाय और टिकाऊ खनन’ का आयोजन किया गया।

संवाद में जिला प्रशासन, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों, खनन क्षेत्र, नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान खनन प्रभावित क्षेत्रों में वायु प्रदूषण, जनस्वास्थ्य, पर्यावरणीय चुनौतियों और टिकाऊ आजीविका के विकल्पों पर गहन चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान *‘टुवर्ड्स सस्टेनेबल माइनिंग एंड हेल्थियर लाइव्स इन धनबाद’* रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इस रिपोर्ट में खनन प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों के अनुभवों, वायु प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं, स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों और स्थानीय विकास की प्राथमिकताओं को सामने लाया गया है।

 उपायुक्त ने बंद खदानों से ऊर्जा उत्पादन का दिया सुझाव
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धनबाद के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने कहा कि धनबाद में सक्रिय कोयला खदानों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों की निकटता के कारण वायु प्रदूषण की चुनौती गंभीर और विशिष्ट है। उन्होंने यूरोप के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि बंद खदानों के वैज्ञानिक पुनरुद्धार और उनके वैकल्पिक उपयोग से पर्यावरणीय सुधार के साथ-साथ आर्थिक अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

उपायुक्त ने कहा कि भारत में सफल अंतरराष्ट्रीय मॉडलों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि बंद भूमिगत खदानों के पानी से भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन तथा गहरी ओपन-कास्ट खदानों को कृत्रिम झीलों में बदलने जैसे विकल्पों का अध्ययन किया जा सकता है।

उन्होंने शोधकर्ताओं और तकनीकी संस्थानों से ऐसे शोध पर जोर देने की अपील की, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके। साथ ही ओवरबर्डन (OB) डंप से उड़ने वाली धूल और काली राख पर नियंत्रण तथा प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण जैसे व्यावहारिक उपायों पर विचार करने को कहा।

 समुदाय की भागीदारी जरूरी

उपायुक्त ने कहा कि पर्यावरण सुधार से जुड़ी योजनाओं में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में जमीन धंसने, वायु एवं जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए अगली पीढ़ी के लिए कोयले से इतर रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र ‘खनन प्रभावित क्षेत्रों में सहभागी दृष्टिकोण को मजबूत करना’ का संचालन शशिधर झा ने किया। सत्र में पर्यावरण समिति के भोलनाथ राम, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील सिन्हा तथा ज्ञान विज्ञान समिति के रवि सिंह ने पर्यावरणीय अनुपालन, धूल नियंत्रण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।

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