मानभूम से झारखंड तक: धनबाद ने 3 राज्य देखे, 24 अक्टूबर 1956 को मिला जिला का दर्जा
शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
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रवि फिलिप्स (ब्यूरो चीफ धनबाद) भानुमित्र न्यूज़🖋️
धनबाद : जिसे आज पूरी दुनिया Coal Capital of India कहती है, उसका जन्म एक दिन में नहीं हुआ। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार धनबाद का इतिहास 3 बड़े पड़ावों में बंटा है।
1928 - पुलिस जिला बना
जब झरिया में कोयले का भंडार मिला और रेल लाइन बिछी, तो आबादी तेजी से बढ़ी। प्रशासन संभालने के लिए 1928 में धनबाद को पुलिस जिला घोषित किया गया। तब यह मानभूम जिले का हिस्सा था जिसका मुख्यालय पुरुलिया में था।
24 अक्टूबर 1956 - जिले का गठन (जन्मदिन)
राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर भारत सरकार की अधिसूचना संख्या 1911 के तहत 24 अक्टूबर 1956 को धनबाद को मानभूम से अलग कर स्वतंत्र जिला बनाया गया। पुराना धनबाद सब-डिवीजन, चास और चंदनकियारी थाने इसमें शामिल किए गए। पत्रकार सतीश चंद्र के प्रयासों से यह संभव हुआ। 2006 में धनबाद ने अपने 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया।
1991 - बोकारो अलग हुआ
विशाल क्षेत्रफल के कारण 1991 में धनबाद के चास अनुमंडल को काटकर नया बोकारो जिला बनाया गया। इससे धनबाद का क्षेत्रफल घटकर 2995 वर्ग किमी रह गया।
15 नवंबर 2000 - झारखंड का हिस्सा बना
1956 से 14 नवंबर 2000 तक धनबाद बिहार का हिस्सा रहा। झारखंड आंदोलन के बाद 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड राज्य बना, तो धनबाद उसकी आर्थिक राजधानी बन गया।
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