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टीबी मरीजों को शत-प्रतिशत पोषण सहायता, स्वास्थ्य उपकेंद्रों में प्रसव शुरू कराने की तैयारी तेज; मातृ-शिशु मृत्यु से लेकर कुपोषण तक की समीक्षा

टीबी मरीजों को शत-प्रतिशत पोषण सहायता, स्वास्थ्य उपकेंद्रों में प्रसव शुरू कराने की तैयारी तेज; मातृ-शिशु मृत्यु से लेकर कुपोषण तक की समीक्षा



पाकुड़ : जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, मातृ-शिशु मृत्यु के कारणों की पहचान करने, कुपोषित बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और टीबी एवं कालाजार मरीजों को शत-प्रतिशत पोषण सहायता सुनिश्चित करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप काम करने, स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और आम लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के निर्देश दिए।

बैठक में कालाजार, मलेरिया, फाइलेरिया एवं टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, टीबी मुक्त भारत अभियान, राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस), परिवार नियोजन, पोषण पुनर्वास केंद्र (एमटीसी), यू-विन, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई।

 मातृ-शिशु मृत्यु के हर मामले की समीक्षा कर सुधारात्मक कार्रवाई का निर्देश

मातृ मृत्यु समीक्षा (एमडीआर) एवं बाल मृत्यु समीक्षा (सीडीआर) के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी गर्भवती महिला की उपचार के दौरान मृत्यु होने पर उसकी अनिवार्य रूप से समीक्षा की जाए। यह समीक्षा सरकारी अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थान में या गांव स्तर पर हुई मृत्यु के मामलों में भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने मृत्यु के कारणों की विस्तृत जानकारी जुटाकर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।

परिवार नियोजन ऑपरेशन के बाद होने वाली मृत्यु के मामलों की तत्काल रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को भी कहा गया। इसका उद्देश्य संबंधित लाभुक को नियमानुसार मिलने वाली सहायता एवं अन्य लाभ समय पर उपलब्ध कराना है।

 टीबी मरीजों को शत-प्रतिशत पोषण सहायता देने पर विशेष जोर

टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संभावित टीबी मरीजों की पहचान और जांच में तेजी लाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने अति जोखिम वाले गांवों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर संभावित मरीजों की बलगम एवं एक्स-रे जांच सुनिश्चित करने को कहा।

टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले व्यक्तियों की पहचान कर संक्रमण से बचाव के लिए टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) की दवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत मिलने वाली पोषण सहायता का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने को कहा गया।

उपायुक्त ने जिले के सभी टीबी एवं कालाजार मरीजों को शत-प्रतिशत पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिक से अधिक निक्षय मित्र बनाने के लिए सामाजिक संगठनों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और समाज के सक्षम लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया, ताकि मरीजों को आवश्यक सहयोग मिल सके।

 नाइट ब्लड सर्वे में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण स्तर के कर्मियों की भागीदारी जरूरी

फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आयोजित होने वाले रात्रिकालीन रक्त सर्वेक्षण (नाइट ब्लड सर्वे) की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने संबंधित विभागों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने मुखिया एवं अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, आशा कार्यकर्ताओं तथा आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से सर्वेक्षण दल को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने को कहा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संभावित मरीजों की पहचान हो सके और कोई भी व्यक्ति जांच से वंचित न रहे।

 कालाजार और मलेरिया की रोकथाम के लिए समय पर जांच व उपचार

कालाजार एवं मलेरिया की रोकथाम को लेकर उपायुक्त ने संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने आम लोगों को मच्छरजनित एवं रोगवाहक कीटों से फैलने वाली बीमारियों से बचाव और उनकी रोकथाम के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।

संबंधित अधिकारियों को इन बीमारियों की रोकथाम के लिए संचालित गतिविधियों की नियमित निगरानी करने तथा योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा गया।

 कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने के लिए प्रखंडवार लक्ष्य

कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार से संबंधित समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने पोषण पुनर्वास केंद्र (एमटीसी) में बच्चों के भर्ती होने की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि कुपोषित बच्चों को केंद्र तक लाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही या कमी नहीं होनी चाहिए।

इसके लिए सभी प्रखंडों की महिला पर्यवेक्षिकाओं के लिए कुपोषित बच्चों को एमटीसी तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा गया। समय पर पहचान के साथ बच्चों को उचित उपचार और पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।

 गर्भवती महिलाओं को जांच, दवा और परामर्श की गुणवत्तापूर्ण सुविधा

ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को नियमित जांच, आवश्यक परामर्श, दवाएं और निर्धारित स्वास्थ्य सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में प्रसव सुविधा शुरू कराने की तैयारी पूरी करने का निर्देश

स्वास्थ्य उपकेंद्र स्तर पर प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर उपायुक्त ने आवश्यक तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को स्वास्थ्य उपकेंद्रों में नियमित रूप से उपस्थित रहने और वहां प्रसव सुविधा शुरू कराने की दिशा में सक्रियता से काम करने को कहा।

इस संबंध में सीएचओ एवं बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मियों (एमपीडब्ल्यू) के साथ अलग से बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया। बैठक में स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर उपलब्ध संसाधनों, मौजूदा समस्याओं और आवश्यकताओं की समीक्षा कर उनका समाधान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों को प्रसव की सुविधा मिल सके।

 बिजली और शीत शृंखला की व्यवस्था दुरुस्त रखने पर जोर

स्वास्थ्य संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सौर ऊर्जा प्रणाली और शीत शृंखला केंद्र की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। वहीं, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और जिला स्तर पर जनरेटर की व्यवस्था उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि बिजली की समस्या के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों और आवश्यक सेवाओं का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहे।

 राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य संस्थानों को तैयार करने का निर्देश 

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने स्वास्थ्य संस्थानों में निर्धारित मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और आवश्यक सुविधाओं को तय मानकों के अनुरूप बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

स्वास्थ्य संस्थानों में मौजूद कमियों की पहचान कर उनका समयबद्ध निराकरण करने का भी निर्देश दिया गया, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

 यू-विन पोर्टल पर टीकाकरण का शत-प्रतिशत रिकॉर्ड अद्यतन करने का निर्देश 

यू-विन पोर्टल की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने प्रत्येक माह शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने टीकाकरण से संबंधित सभी आंकड़ों और जानकारियों की पोर्टल पर समय पर तथा शत-प्रतिशत प्रविष्टि अद्यतन करने को कहा, ताकि टीकाकरण कार्यक्रम की प्रगति का सही आकलन किया जा सके।

 डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और ओपीडी-आईपीडी में वृद्धि पर जोर 

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने स्वास्थ्य संस्थानों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) एवं भर्ती मरीजों के उपचार से संबंधित अंतरंग रोगी विभाग (आईपीडी) सेवाओं की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया।

उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आंकड़ों को नियमित रूप से अद्यतन रखने और डिजिटल व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और निगरानी को बेहतर बनाया जा सके।

 15वें वित्त आयोग और स्वास्थ्य आधारभूत संरचना मिशन की अलग बैठक होगी

बैठक में 15वें वित्त आयोग तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य आधारभूत संरचना मिशन (पीएम-अभीम) के कार्यों की समीक्षा के लिए अलग से बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और आधारभूत संरचनाओं के विकास की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करना है, ताकि आवश्यक सुधार और विकास कार्यों को गति दी जा सके।

 
उपायुक्त ने जिले के सभी विद्यालयों में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उमंग दिवस का व्यापक एवं उत्साहपूर्वक आयोजन सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि बच्चों और किशोर-किशोरियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।

 विद्यालयों को धूम्रपान मुक्त बनाने के लिए जांच अभियान तेज होगा

सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) के तहत जांच और कार्रवाई अभियान तेज करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने विद्यालयों को धूम्रपान मुक्त बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा। इस संबंध में जिला कार्यक्रम प्रबंधक एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

 विभागीय समन्वय से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ 
उपायुक्त ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस), पंचायती राज, शिक्षा विभाग, समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) और अन्य संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच तालमेल और सामुदायिक सहभागिता बेहद जरूरी है। सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करने, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाने, योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा प्रगति की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, डीएस, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम), जिला मलेरिया पदाधिकारी, सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी), वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार सहित स्वास्थ्य विभाग के संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

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