अमड़ापाड़ा की दुर्गापूजा का 102वां वर्ष होगा खास, 35 लाख से अधिक खर्च के साथ काशी की गंगा आरती बनेगी आकर्षण
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
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अमड़ापाड़ा : बांसलोई नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक वैष्णवी दुर्गा मंदिर परिसर में इस वर्ष शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। वर्ष 1924 में स्थापित सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति इस बार पूजा का 102वां वर्ष मनाने जा रही है। आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिए समिति ने 35 लाख रुपए से अधिक का बजट निर्धारित किया है। उत्कृष्ट व्यवस्था, अनुशासन, भव्य विद्युत सज्जा और आकर्षक पंडाल के लिए अपनी अलग पहचान बना चुकी अमड़ापाड़ा दुर्गापूजा को जिला प्रशासन की ओर से हर वर्ष जिले में प्रथम स्थान देकर पुरस्कृत किया जाता रहा है। समिति के सदस्य और ग्रामीण इस परंपरा को कायम रखने के लिए इस बार भी पूरी तैयारी में जुटे हैं।
अमड़ापाड़ा की दुर्गापूजा की सबसे खास बात यह है कि पूरे गांव में मां दुर्गा की पूजा के लिए केवल एक ही मंडप बनाया जाता है। इसी एक मंडप के नीचे गांव के लोग जात-पात और ऊंच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ पूजा में शामिल होते हैं। दशकों से चली आ रही यह परंपरा अमड़ापाड़ा में आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और एकजुटता का उदाहरण पेश करती है। ग्रामीण न केवल पूजा में एक साथ शामिल होते हैं, बल्कि आयोजन की तैयारियों में भी मिलकर अपनी भागीदारी निभाते हैं।
इस वर्ष पूजा पंडाल को भी विशेष रूप दिया जा रहा है। भगत डेकोरेटर्स द्वारा मंदिर परिसर में करीब 5500 वर्गफुट क्षेत्र में मुख्य पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए शिव-पार्वती मंदिर परिसर में करीब 3500 वर्गफुट का अतिरिक्त पंडाल भी बनाया जा रहा है। पंडाल निर्माण में 25 कुशल कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। वहीं पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध मूर्तिकार करीब 3 लाख रुपए की लागत से मां दुर्गा की 15 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा तैयार कर रहे हैं।
पूजा की भव्यता को और बढ़ाने के लिए चंदननगर से विशेष लाइट डिजाइनर टीम बुलाई गई है। टीम द्वारा मंदिर परिसर और मुख्य मार्ग पर करीब 18 लाख रुपए की लागत से आकर्षक तोरण द्वार और विद्युत सज्जा की जा रही है। इस बार महाअष्टमी यानी 18 अक्टूबर की शाम वाराणसी से आने वाली पंडितों की टीम द्वारा भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। काशी की इस विशेष आरती को पूजा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन के दौरान सुरक्षा को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है। पूरे परिसर में 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं और अग्निशामक यंत्रों की भी व्यवस्था की जा रही है।
समिति ने धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की समय-सारिणी भी जारी कर दी है। 11 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे के बीच कलश स्थापना के साथ नवरात्र की शुरुआत होगी। 16 अक्टूबर को षष्ठी के अवसर पर शाम 5:00 बजे देवी बोधन होगा और रात 8:00 बजे से जूनियर ग्रुप डांस प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 17 अक्टूबर सप्तमी को सुबह 7:15 बजे नवपत्रिका प्रवेश कराया जाएगा। 18 अक्टूबर अष्टमी को महाअष्टमी पूजन के साथ सुबह 11:15 बजे से प्रसाद वितरण, शाम 7:45 बजे गंगा आरती, रात 8:30 बजे कन्या पूजन और रात 9:30 बजे महानिशा पूजा होगी। 19 अक्टूबर नवमी को संधि पूजा और हवन के बाद रात में डांडिया नृत्य का आयोजन होगा। 20 अक्टूबर दशमी के दिन दोपहर 1:00 बजे नगर भ्रमण के साथ कलश विसर्जन किया जाएगा। इसके बाद 21 अक्टूबर को सीनियर ग्रुप डांस एवं सम्मान समारोह, 25 अक्टूबर को कोजागरी लक्ष्मी पूजन और 02 नवंबर को नगर भ्रमण के बाद प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।
पूजा समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार उर्फ बबलू भगत ने बताया कि 102वें वर्ष के इस ऐतिहासिक आयोजन को विशेष बनाने के लिए समिति पूरी लगन के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे गांव का एक ही मंडप के नीचे एकजुट होकर पूजा करना और हर वर्ष जिला प्रशासन की ओर से प्रथम पुरस्कार प्राप्त करना समिति के लिए गौरव की बात है। इस बार भव्य पंडाल, 3 लाख रुपए की लागत से तैयार हो रही 15 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा और वाराणसी की गंगा आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
एक ही मंडप में पूरा गांव, सामाजिक समरसता की मिसालअमड़ापाड़ा दुर्गापूजा की सबसे बड़ी खासियत और परंपरा यह है कि पूरे गांव में केवल एक ही स्थान पर मां दुर्गा की पूजा आयोजित होती है। जात-पात और ऊंच-नीच के भेदभाव से परे पूरा अमड़ापाड़ा गांव इसी एक मंडप के नीचे एकजुट होता है। दशकों से चली आ रही यह परंपरा आपसी भाईचारे, कौमी एकता और सामाजिक समरसता का अनोखा संदेश देती आ रही है। ग्रामीण एक साथ मिलकर पूजा की तैयारियों में भाग लेते हैं और त्योहार की खुशियां बांटते हैं।
15 फीट ऊंची प्रतिमा और 5500 वर्गफुट का भव्य पंडाल होगा आकर्षण
इस बार मंदिर परिसर में भगत डेकोरेटर्स द्वारा करीब 5500 वर्गफुट में भव्य और आकर्षक मुख्य पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए शिव-पार्वती मंदिर परिसर में 3500 वर्गफुट का अतिरिक्त पंडाल भी बनाया जा रहा है। पंडाल निर्माण कार्य में 25 कुशल कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं।
वहीं, पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध मूर्तिकारों द्वारा करीब 3 लाख रुपए की लागत से मां दुर्गा की 15 फीट ऊंची भव्य और आकर्षक प्रतिमा गढ़ी जा रही है। प्रतिमा और पंडाल इस वर्ष पूजा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होंगे।
चंदननगर की विद्युत सज्जा और काशी की गंगा आरती रहेगी विशेष आकर्षण
बंगाल के चंदननगर से आ रही विशेष लाइट डिजाइनर टीम द्वारा मंदिर और मुख्य मार्ग पर करीब 18 लाख रुपए की लागत से आकर्षक तोरण द्वार और विद्युत सज्जा की जा रही है। इस बार महाअष्टमी की शाम 18 अक्टूबर को धर्मनगरी वाराणसी (काशी) से आ रही पंडितों की टीम द्वारा भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा, जो पूजा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी।
सुरक्षा व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी गई है। पूरे पूजा परिसर में 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अग्निशामक यंत्र की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
11 अक्टूबर से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान, 20 अक्टूबर को कलश विसर्जन
समिति द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 11 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक कलश स्थापना के साथ नवरात्र का शुभारंभ होगा।
16 अक्टूबर षष्ठी की शाम 5:00 बजे देवी बोधन और रात 8:00 बजे से जूनियर ग्रुप डांस प्रतियोगिता आयोजित होगी। 17 अक्टूबर सप्तमी को सुबह 7:15 बजे नवपत्रिका प्रवेश कराया जाएगा।
18 अक्टूबर अष्टमी को महाअष्टमी पूजन होगा। सुबह 11:15 बजे से प्रसाद वितरण, शाम 7:45 बजे गंगा आरती, रात 8:30 बजे कन्या पूजन और रात 9:30 बजे महानिशा पूजा होगी।
19 अक्टूबर नवमी को संधि पूजा और हवन होगा। इसके बाद रात में डांडिया नृत्य का आयोजन किया जाएगा। 20 अक्टूबर दशमी को दोपहर 1:00 बजे नगर भ्रमण के साथ कलश विसर्जन किया जाएगा।
इसके बाद 21 अक्टूबर को सीनियर ग्रुप डांस और सम्मान समारोह आयोजित होगा। 25 अक्टूबर को कोजागरी लक्ष्मी पूजन किया जाएगा, जबकि 02 नवंबर को नगर भ्रमण के बाद प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।
पूजा समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार उर्फ बबलू भगत ने बताया कि 102वें वर्ष के इस ऐतिहासिक आयोजन को अद्भुत बनाने के लिए समिति पूरी लगन से जुटी है। पूरे गांव का एक ही मंडप पर एकजुट होना और हर साल जिला प्रशासन से प्रथम पुरस्कार पाना समिति के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि भव्य पंडाल, 3 लाख रुपए की लागत से बन रही मां दुर्गा की प्रतिमा और वाराणसी की गंगा आरती इस बार श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण होंगे।
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