-->
चूहाड़ी का गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, दावों की खुली पोल

चूहाड़ी का गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, दावों की खुली पोल

पाकुड़िया : देश जहाँ डिजिटल प्रगति और आधुनिक सुविधाओं की बात कर रहा है, वहीं जिले के पाकुड़िया प्रखंड के तेगुड़िया गांव में आज भी लोग बुनियादी जरूरत पेयजल के लिए जूझ रहे हैं। सरकारी नल-जल योजना के दावे यहाँ पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं और ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
तेगुड़िया गांव में लगभग 150 से 200 परिवार निवास करते हैं, लेकिन यहाँ पेयजल का कोई स्थायी साधन उपलब्ध नहीं है। भीषण गर्मी और कड़ी धूप में ग्रामीण पास की नदी के किनारे चूहाड़ी खोदकर पानी इकट्ठा करते हैं। मिट्टी से रिसकर जमा होने वाला मटमैला पानी ही उनकी प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा है।
ग्रामीण अभिमान राय ने बताया कि गरीबी के कारण उनके पास कोई विकल्प नहीं है। गंदा पानी पीने से बच्चों सहित ग्रामीण अक्सर बीमार पड़ते हैं, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। दूषित पानी के कारण गांव में चर्म रोग, पेचिश और पेट दर्द जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।
स्थिति यह है कि लोग पानी में मौजूद गंदगी और कीड़ों को कपड़े से छानकर पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य सुविधा भी दूर होने के कारण बीमारी की हालत में इलाज मिलना और कठिन हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले अब गांव की ओर रुख नहीं कर रहे हैं।
पाकुड़िया प्रखंड के कई गांवों में चापाकल वर्षों से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए कोई पहल नहीं हो रही है। संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण ग्रामीण नाले और चूहाड़ी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द पेयजल की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि उन्हें इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।

0 Response to "चूहाड़ी का गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, दावों की खुली पोल"

Ads 1

TOP CONTENT

ADS 3

ADS 4