संघर्ष से स्वावलंबन तक: सुहागिनी दीदी बनीं प्रेरणा की मिसाल
शनिवार, 4 अप्रैल 2026
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पाकुड़ : शनिवार को जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत सीतारामपुर गांव की रहने वाली सुहागिनी दीदी आज संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। एक समय रोजगार की तलाश में पलायन को मजबूर रहने वाली सुहागिनी दीदी आज अपने क्षेत्र के किसानों के लिए नई राह दिखा रही हैं।
उनकी सफलता की शुरुआत वर्ष 2016 में सूरजमुखी आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के साथ हुई। इसके बाद जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी परियोजना के तहत उन्हें आधुनिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण मिला, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
परियोजना के अंतर्गत उन्हें सूक्ष्म टपक सिंचाई यंत्र, वर्मी कंपोस्ट इकाई एवं पॉली नर्सरी गृह उपलब्ध कराया गया। इन संसाधनों की मदद से उन्होंने कम लागत में अधिक उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया।
सुहागिनी दीदी ने टपक सिंचाई तकनीक अपनाकर बैंगन की खेती की, जिससे उन्हें लगभग 30 हजार रुपये की आय हुई। यह उनकी पहली बड़ी सफलता रही। इसके बाद उन्होंने तकनीकी विधि से 25 डिसमिल भूमि पर जी-9 किस्म के केले की खेती की। इसमें 24 क्विंटल उत्पादन हुआ, जिसे मुरारई एवं स्थानीय बाजार में बेचकर लगभग 67 हजार 200 रुपये की आय प्राप्त की।
वर्तमान में वे कृषि एवं उद्यान विभाग के सहयोग से अपनी खेती का विस्तार कर रही हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत उन्हें एक एकड़ भूमि के लिए टपक सिंचाई यंत्र एवं मल्चिंग प्लास्टिक उपलब्ध कराया गया है। आगामी मौसम में वे बड़े स्तर पर बैंगन की खेती करने की तैयारी कर रही हैं।
आज सुहागिनी दीदी न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती एवं सूक्ष्म टपक सिंचाई अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय जिला प्रशासन एवं झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी को देते हुए कहा कि मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सहयोग के बिना यह संभव नहीं था।
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