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पाकुड़िया में बदला मौसम का मिजाज: नीले गगन और बादलों की लुका-छिपी ने बढ़ाया रोमांच, तो बढ़ी किसानों की धड़कनें

पाकुड़िया में बदला मौसम का मिजाज: नीले गगन और बादलों की लुका-छिपी ने बढ़ाया रोमांच, तो बढ़ी किसानों की धड़कनें

पाकुड़िया (पाकुड़):मई महीने की जिस चिलचिलाती धूप और लू से लोग बेहाल रहा करते थे, आज 8 मई को पाकुड़िया प्रखंड क्षेत्र में मौसम का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। शुक्रवार दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों ने धरती को अपनी आगोश में ले लिया। आलम यह है कि नीला आसमान मानो जमीन को छूने को बेताब दिख रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का नजारा किसी हिल स्टेशन जैसा खुशनुमा हो गया है।अद्भुत नजारा, कैमरों में कैद हो रहे पलआमतौर पर जनवरी से अप्रैल तक बढ़ने वाली गर्मी मई में अपने चरम पर होती है, लेकिन इस बार प्रकृति का मिजाज बदला-बदला सा है। आसमान में छाई नीली चादर और सुहावनी हवाओं ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दी है। इस मनमोहक दृश्य को लोग अपने मोबाइल और कैमरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी पाकुड़िया की ये खूबसूरत तस्वीरें खूब सुर्खियां बटोर रही हैं।किसानों के चेहरे पर खुशी के साथ चिंता की लकीरेंएक ओर जहां आम लोग इस खुशनुमा मौसम का आनंद ले रहे हैं, वहीं अन्नदाता की चिंता बढ़ गई है। किसानों का मानना है कि बिन मौसम की यह बारिश खेती के समीकरण बिगाड़ सकती है। किसानों को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि यदि अभी इसी तरह बारिश होती रही, तो मुख्य मानसून के समय कहीं आसमान दगा न दे जाए।पलायन का सता रहा है डरग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा है कि अगर मानसून के वक्त बारिश कम हुई, तो सूखा पड़ने की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में खेती चौपट होने के बाद रोजगार की तलाश में लोगों को एक बार फिर पलायन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। फिलहाल, पूरा क्षेत्र प्रकृति के इस अद्भुत और विरोधाभासी रूप का गवाह बन रहा है—जहां एक तरफ सुकून है, तो दूसरी तरफ भविष्य की अनिश्चितता।

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