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सिंदरी की सड़कों पर बरसात का कहर। गड्ढे, अंधेरा और आवारा पशुओं का राज। हादसों में झुलस रही बेटियां, प्रशासन कागजों में व्यस्त।

सिंदरी की सड़कों पर बरसात का कहर। गड्ढे, अंधेरा और आवारा पशुओं का राज। हादसों में झुलस रही बेटियां, प्रशासन कागजों में व्यस्त।


सिंदरी:बरसात सिर्फ पानी नहीं लाती, वह सिस्टम की नाकामी भी उजागर करती है। सिंदरी टाउनशिप की सड़कें आज उसी नाकामी का सबसे बड़ा सबूत हैं। 

यहां हर बरसात में गड्ढे गहरे होते हैं, सड़कें दरकती हैं, और जिम्मेदार फाइलों में "मरम्मत प्रस्तावित" लिखकर इतिश्री कर लेते हैं। इस बार तस्वीर और डरावनी है। गड्ढों के साथ सड़कों पर आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों का कब्जा हो गया है। 

शाम ढलते ही कुत्तों के झुंड अचानक सड़क पर आ जाते हैं। बाइक सवार संतुलन खोकर गिरते हैं। दिन में मवेशी बीच सड़क पर डेरा जमाए रहते हैं। पानी भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते। नतीजा? हर दिन कोई न कोई घायल, कोई न कोई अस्पताल।

 
धनबाद  जिला कांग्रेस के महासचिव  अजय सिंह ने  प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा,"जनता टैक्स देती है सुविधा के लिए, मौत के लिए नहीं। सिंदरी की सड़कों पर हर कदम पर खतरा है। नगर परिषद और प्रबंधन दोनों जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। 
जेएमएम के युवा नेता रोहित मंडल ने इस बदहाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा,"सिंदरी की सड़कें अब विकास का नहीं, मौत का मॉडल बन गई हैं। 30 जून को हमारे सिंदरी शहर की बेटी ऋतिका इसी लापरवाही की भेंट चढ़ी। पाटलिपुत्र हॉस्पिटल में वह आज भी जिंदगी और मौत से लड़ रही है। अगर समय पर सड़कें बनतीं, लाइटें जलतीं, आवारा पशुओं को हटाया जाता तो शायद एक घर न उजड़ता।"
दोनों नेताओं ने प्रशासन से 15 दिन में सड़कों की मरम्मत,और एनिमल शेल्टर बनाने की संयुक्त मांग की है।

दोनों नेताओं ने की अपील बचा लीजिए सिंदरी की बेटी को
ऋतिका सिंदरी की बेटी, 30 जून के सड़क हादसे के बाद से पाटलिपुत्र हॉस्पिटल, धनबाद में वेंटिलेटर पर है। सिर में गहरी चोट है। डॉक्टरों के मुताबिक इलाज लंबा चलेगा।  ऋतिका सिंदरी अर एन  रोड़ाबंद  कॉलोनी की निवासी है
परिवार पर हर दिन ₹10,000 का इलाज का बोझ है। 

दोनों  नेताओं ने कहा एक छोटी सी मदद एक अनमोल ज़िंदगी बचा सकती है
आपका सहयोग ऋतिका को नया जीवन दे सकता है। कृपया अपनी क्षमता अनुसार मदद करें। 

सवाल अंत में वही है क्या सिंदरी को हर हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी? या इस बार कोई ठोस कदम उठेगा?

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