श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गूंजा ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की
गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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हिरणपुर : बजरंग युवा क्लब धोवाडांगा के प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन किया गया। कथा व्यास सत्यम जी महाराज ने अपने मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। जैसे ही महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया, पूरा कथा पंडाल “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।
कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कथा स्थल को विशेष रूप से सजाया गया था। श्रद्धालुओं में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
सत्यम जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी अधर्म के विनाश और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनकी लीलाओं से प्रेम, भक्ति, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारे लगाए। महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों ने भक्ति भाव से जन्मोत्सव में सहभागिता की। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना एवं आरती की गई। श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया।
कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। सत्यम जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा श्रवण का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन में सदाचार, भक्ति, प्रेम और करुणा का मार्ग दिखाने का माध्यम है।
कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान कथा स्थल का माहौल देखते ही बन रहा था। चारों ओर भक्ति और उल्लास का वातावरण रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में एक-दूसरे को बधाई दी। कार्यक्रम के अंत में भगवान श्रीकृष्ण की आरती के साथ आयोजन का समापन हुआ। कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और आनंद से सराबोर कर दिया। कथा स्थल पर देर तक “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष गूंजते रहे।
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